शुगर का आयुर्वेदिक उपचार


मधुमेह


हम जो भी खाते है उसे हमारा पाचन तंत्र ग्लूकोज बना कर रक्त में भेज देता है इसे हमारे शरीर की कोशिकाओं में पहुँचाने के लिए इंन्सुलीन नामक हारमोन की जरुरत होती है। जब हमारा शरीर इंसुलिन का उत्पादन करने में सक्षम नहीं होता है , तब ग्लुकोज रक्त में बढता जाता है मगर कोशिकाओं के अन्दर नहीं घुस पाता है यही मधुमेह कहलाता है।

टाइप -1 इसमें पैन्क्रियाज की बीटा कोशिकाएँ पूर्णतः नष्ट हो जाती हैं और इस तरह शरीर में इंन्सुलीन का बनना सम्भव नहीं होता है। अनुवांशिक कारणों , आँटो इम्युनिटी एवं किसी प्रकार के वाइरल संक्रमण के कारण बचपन में ही बीटा कोशिकाएँ पूर्णतः नष्ट हो जाती हैं। यह बीमारी मुख्यतः 12 से 25 साल से कम अवस्था में मिलती है। भारत में यह बहुत ही कम मात्र 1% से 2% केसों में ही टाइप-1 के मरीज़ पाये जाते है। यूरोप विशेषकर स्वीडेन एवं फिनलैण्ड आदि में लोगो में टाइप-1 मधुमेह काफी पाया जाता है। ऐसे मरीजों इंसुलीन की सूई अनिवार्य रूप से दी जाती है।


टाइप -2 भारत में ज्यादातर 98% तक मधुमेह के रोगीयों में टाइप-2 का मधुमेह पाया जाता हैं। ऐसे मरीजों में बीटा कोशिकाएँ कुछ-कुछ इन्सुलीन बनाती है। लेकिन यह थोड़ा बहुत बना हुआ इंसुलीन

मधुमेह के मुख्य कारण 



आज भारत की बहुत बड़ी आबादी मधुमेह या शुगर के चंगुल में फंसती जा रही है 40 -45 के उम्र के बाद तो 20 प्रतिशत से ज्यादा लोग इसकी गिरफ्त में है अब तो नौजवान और बच्चे भी शुगर की बीमारी का शिकार हो रहे है।  शुगर एक ऐसी अवस्था है जिसमे शरीर में इन्सुलिन की कमी हो जाती है या शरीर में इन्सुलिन तो होता है मगर वो सही तरीके से शुगर नहीं बना पाता। इससे रक्त में इन्सुलिन की कमी के कारण ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ जाती है।

मधुमेह निम्नलिखित कारणों से ज्यादा होता है।

1. अगर आपके परिवार में किसी को पूर्व में मधुमेह है तो आपको या बीमारी होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

2. मोटापा मधुमेह का बहुत बड़ा कारण है, मोटे लोग मधुमेह के जल्दी शिकार हो जाते है

3. शरीर में कैलोस्ट्राल की अधिक मात्रा होना या रक्त चाप के असामान्य होने से भी मधुमेह का खतरा अधिक बढ़ जाता है

4. अधिक शरीरिक श्रम, थकान, मानसिक थकान, तनाव, आदि के कारण भी लोग मधुमेह के शिकार हो जाते है

5. अधिक मीठा खाने से भी मधुमेह हो सकती है। 

6. जो लोग नियमित रूप से बाहर का खाना खाते है उन्हें मधुमेह होने की आशंका तीन गुना ज्यादा तक होती है

7. स्वस्थ शरीर के लिए कम से कम 4 लीटर पानी अवश्य ही पीना चाहिए कम पानी पीने से भी मधुमेह होने की अधिक सम्भावना होती है

8. असमय खाने से जंक फ़ूड खाने, बासी खाने या फ्रिज में ज्यादा दिन तक रखे खाने से भी लोग मधुमेह के जल्दी शिकार हो जाते है

9. अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से सैर करना या व्यायाम करना आवश्यक है। एक्सरसाइज ना करने से भी मधुमेह होने का खतरा बढ़ जाता है।

10. रात में देर से खाना खाने और खाने के बाद तुरंत सो जाने से भी शुगर / डायबटीज़ हो सकती है।

मधुमेह के लक्षण 


मधुमेह को तमाम बिमारियों का जनक माना गया है। मधुमेह होने के बाद शरीर को बहुत सी बीमारियाँ आसानी से घेर लेती है 35 वर्ष के बाद तो नियमित रूप से शुगर की जाँच अवश्य ही करानी चाहिए वैसे बहुत से ऐसे शुरूआती लक्षण है जिनसे मधुमेह होने का संकेत मिलने लगता है। इसलिए शरीर पर इन लक्षणों के नज़र आते ही सावधान हो जाना चाहिए , अपने खान-पान का ध्यान रखे , और कुशल चिकित्सक से शीघ्र ही परामर्श करें

1. बार-बार पेशाब आना।

2. बहुत ज्यादा प्यास लगना।

3. बहुत पानी पीने के बाद भी गला सूखना।

4. खाना खाने के बाद भी बहुत भूख लगना।

5. मितली होना और कभी-कभी उल्टी होना।

6. हाथ-पैर में अकड़न और शरीर में झंझनाहट होना।

7. त्वचा में रूखापन आना।

8. चिड़चिड़ापन।

9. सिरदर्द।

10. शरीर का तापमान कम होना।

11. मांसपेशियों में दर्द।

12. वजन में कमी होना।

यदि हम थोड़ी सी सावधानी बरते, आपने जीवनशैली , खान-पान की आदतों में सुधार करें तो इस पर अवश्य ही विजय प्राप्त कर सकते है।

मधुमेह को कम करने के कुछ उपाय 


शुगर कम करने के उपाय अर्थात शुगर बहुत सी बिमारियों का जनक है , जो धीरे धीरे पूरे शरीर को खोखला कर देता है। मधुमेह के कारण ना केवल शरीर में बहुत सी बीमारियाँ घर कर जाती है  शरीर की प्रतिरोधक क्षमता एवं कार्य क्षमता भी कम हो जाती है लेकिन कुछ उपायों को नियम से करके ना केवल शुगर को नियंत्रण ही किया जा सकता है ,शुगर से छुटकारा भी पाया जा सकता है। यहाँ पर हम शुगर के घरेलु किन्तु अचूक उपाय बता रहे है जो अवश्य ही लाभकारी सिद्ध होंगे, 

1. गेहूं के पौधों में रोगनाशक गुण होते हैं। गेहूं के छोटे-छोटे पौधों से रस निकालकर प्रतिदिन सेवन करने से भी शुगर नियंत्रण में रहती है।

2. मधुमेह /शुगर के मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में खीरा नींबू निचोड़कर खाकर भूख मिटाना चाहिए।

3. शुगर के उपचार मे शलजम का भी बहुत महत्व है शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होने लगती है। इसके अतिरिक्त मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का प्रयोग भी ज्यादा करना चाहिए।

4.पेट, पानी के साथ लें और सेवन के बाद कम से कम आधा घंटा और कुछ खाएं , इसके नियमित सेवन से भी शुगर सामान्य हो जाती है

5. वैज्ञानिकों की नई शोध में अदरक शुगर की बीमारी में बेहद कारगर साबित हुई है। आस्ट्रेलिया में किये गए एक शोध के अनुसार अदरक का रस खून में शर्करा के स्तर को पूरी तरह से नियंत्रित करता है। पुराने से पुराने शुगर में भी जिसमें शरीर के अंग भी प्रभावित हो चुके हो नित्य खाली पेट अदरक का रस बेहद फायदेमंद है।

6. 6. शुगर के उपचार में सोया आटे की रोटी खानी चाहिए सोयाबीन में स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट बहुत कम मात्रा में होता है और यही चीज़े शुगर में हानिकारक होती है अत: सोयाबीन को पीस कर आटे में मिलाकर खाने से मधुमेह नियंत्रण में रहता है

7. मधुमेह/शुगर के शिकार व्यक्ति को अपने आहार में एलो वेरा जूस को अवश्य ही शामिल करना चाहिए। एलो वेरा में मौजूद विभिन्न प्रकार के विटामिन्स, मिनरल्स, खनिज शरीर के सेल स्तर पर काम करते है जिससे शरीर शर्करा की मात्रा नियंत्रित होती है और व्यक्ति चुस्त और दुरुस्त भी रहता है।

8. मधुमेह/शुगर से ग्रस्त व्यक्ति के लिए अलसी का सेवन उपयुक्त है अलसी को मिक्सी में पीसकर आटा में मिलकर इसकी रोटी खाएं इससे शरीर में लम्बे समय तक ताकत रहती है

9. मधुमेह/शुगर में नित्य अमरुद का सेवन करें इसे महीन महीन काट काट कर उसपर सेंधा / काला नमक और काली मिर्च छिड़क कर खाना चाहिए, इससे शुगर में बहुत ज्यादा आराम मिलता है

10. मधुमेह/शुगर को नियंत्रित करने के लिए दक्षिण की तरफ सर करके सोएं , अपने बैडरूम में कम से कम 100 ग्राम का साबुत फिटकरी का टुकड़ा अवश्य ही रखें इससे शुगर को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है

कुछ घरेलू उपचार 


1. शक्कर खाएं

आज हम आपको बताने जा रहे की शक्कर जो आज हमारी रोज की जरुरत बन गयी है वह हमारे लिए कितनी हानिकारक हो सकती है। वैसे तो शक्कर हमारे शारीर के लिए बहुत जरुरी है और इसके कई फायदे है, जैसे शक्कर कम ब्लॅड प्रेसर वालो के लिए वरदान है, डिप्रेशन दूर करने की बात हो या भूख मिटने की बात हो शक्कर बहुत जरुरी है। लेकिन हम जानते है किसी भी चीज़ का जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल हमेशा हानिकारक होता है वही शक्कर के साथ है, शक्कर शुगर ( मधुमेह ) बढ़ाने में बहुत बढ़ाने में बहुत योगदान देती है। जिन लोगों में शुगर ज्यादा है उन्हें शक्कर बिलकुल छोड़ देनी चाहिए। हमारे रोजमर्रा के कार्यों में भले वो ऑफिस में कंप्यूटर पर बैठ कर काम करना, या ऑफिस में कोई और काम हो, या कोई भी काम हो सकता है चाय हमारे जीवन में एक बहुत बड़ी जगह लेती जा रही है जो हमारे लिए बहुत ही हानिकारक है। थकान है तो चाय, डिप्रेशन है तो चाय, कोई मीटिंग है तो चाय जो बहुत ज्यादा शक्कर हमारे शरीर में लेकर आती है, अगर हम चाहते है की शुगर कम करें या कभी शुगर हो ही हो चाय जरुरत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। कुछ महत्वपूर्ण चीज़ों पर लगाम लगा कर आप शुगर को कम कर सकते है \n\n. कोल्ड ड्रिंक में शक्कर की बहुत मात्रा होती है \n. मिठाइयां जिनमे शक्कर है बंद करें आदि \n\nआप सोच रहे होंगे की शक्कर बिलकुल बंद कर देने से हम कैसे रहेंगे या वो हमारी रोजमर्रा की जरुरत बन चुकी है हम कैसे छोड़ सकते है। इसका भी एक उपाय है आज बाज़ार में शुगर फ्री गोली उपलब्ध है जिसका उपयोग करके आप आसानी से शुगर सामान्य कर सकते है।
  

2. आलू कम खाएं

  अगर आप शुगर के मरीज है और चाहते है के शुगर कम या बिलकुल ख़त्म हो जाये तो आलू अपने खाने से हटा दीजिये। \nआलू हमारे शारीर में शुगर बहुत तेज़ी से बढता है। आलू में कार्बोहाइड्रेड होता जो शरीर के लिए जरुरी है अगर आप नार्मल है उसके बाद भी हमें आलू कम खाना चाहिए। आलू में विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स तथा आयरन , कैल्शियम, मैंगनीज, फास्फोरस तत्त्व होते हैं तथा आलू को सब्जियों का राजा भी कहा जाता है कोई भी सब्जी हो आलू मिलाओ और सब्जी तैयार यही वो कारण है आलू हमारे जीवन में बहुत उपयोग होता है, लेकिन अगर आपको शुगर है तो आलू छोड़ दीजिये
 

3. चावल खाना बंद करें

 चावल शुगर में बहुत हानिकारक है, अगर आप शुगर सामान्य करना चाहते है तो चावल बिलकुल बंद कर दें, और देखेंगे की इसका फर्क कितनी जल्दी आपके शुगर लेवल पर पड़ता है। चावल वैसे दक्षिण भारत में बहुत ज्यादा खाया जाता है और वहां का प्रमुख आहार माना गया है, चावल को वैसे भात भी कहते है। स्वादिष्ठ होने के बावजूद ये शुगर मरीज़ के लिए बहुत ही हानिकारक है और शुगर बढता है। चावल या चावल के बनीं कोई भी चीज़ आपको नुकसान पहुंचा सकती है इसलिए चावल बंद कर दीजिये और आप इसका असर खुद ही देखेंगे


4. चिकनाई (आयल) कम खाएं

  चिकनाई मतलब आयल जो सिर्फ शुगर मरीज़ के लिए खतरनाक है बल्कि हर आम आदमी के लिए जरुरत से ज्यादा आयल शारीरिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। इसलिए शुगर मरीज़ को स्पेशली चिकनाई बहुत कम खाना चाहिए। आज कल बाहर बाज़ार में मिलने वाली ज्यादार चीज़े भले वो कचोरी, समोसा, पकोड़ी, पूड़ी हो सभी में आयल की मात्रा होती है इसलिए बाहर मिलने वाली इन चीज़ों पर लगाम लगा कर हम अपने शारीर में उपस्थित शुगर के लेवल को कम कर सकते है। कुछ लोगो की आदत होती है खाने में बहुत ज्यादा घी खाना इसलिए हो सके तो घी को अपने खाने से थोड़ा कम कर दीजिये। घी वैसे शरीर के लिए बहुत उपयोगी है लेकिन अगर हम इसे जरुरत से ज्यादा खाएंगे तो ये हमे हानि पहुंचा सकता है इसलिए अगर आप शुगर मरीज़ है तो मेरे ख्याल से तो घी को बंद ही कर दीजिये। जो आपकी शुगर लेवल को कम करने में बहुत योगदान देगा।
  

5. सुबह टहलना चालू करें

  वैसे तो हर बीमारी को ख़त्म करने की लिए कुछ स्पेशल व्यायाम होते है पर हर व्यक्ति व्यस्त दिनचर्या के कारण आराम से बैठ कर व्यायाम भी नहीं कर पाते इसलिए इस टॉपिक में हम आपको बता रहे है की शुगर को सामान्य करने में सुबह टहलना कितना लाभकारी होता है। सुबह टहलने के कई सारे फायदे है जिनमे जैसे - अगर आप सुबह टहलते है तो आपकी हड्डियां मजबूत होंगी ,अगर आप सुबह टहलते है तो ये आपके वजन को कम करने में भी बहुत योगदान देता है , तनाव कम होगा , शुगर बहुत आश्चर्यजनक तरीके से सामान्य करता है। सुबह टहलने से बहुत सारे लाभ मिलते है साथ ही ये शुगर सामान्य भी बहुत तेज़ी से करता है। अब सवाल है की सुबह किस समय टहला जाये - आप अपनी दिनचर्या के हिसाब से सूर्य उदय से पहले वाकिंग पर जा सकते है। सबसे महत्वपूर्ण है की आपको सिर्फ उतना चलना है जितनी आपके शारीर में क्षमता है अगर क्षमता से ज्यादा चलने की कोशिश करेंगे तो इसके आपका शारीर जल्दी थक जायेगा। इसलिए जरुरी है की अपनी क्षमता का सही इस्तेमाल किया जाये।

शुगर में लाभदायक चीजें 

1. करेले के उपयोग



  करेला शुगर मरीज़ के लिए एक वरदान है। अगर आपको शुगर है तो करेले से आपको एक गहरा सम्बन्ध बनाना पड़ेगा क्यों की यही एक चीज़ है जिसमे वो क्षमता है जो शुगर को सामान्य कर सकती है। करेले का प्रयोग हम विभिन्न तरीके से कर सकते है जो हम इस टॉपिक में आपको बताने जा रहे है।
1) करेले की सब्जी - आपके खाने में रोज एक सब्जी होनी चाहिए वो है करेले की सब्जी। करेले की सब्जी शुगर मरीज़ को बहुत लाभदायक है। कुछ लोग करेले की सब्जी बनाते समय करेले को बिलकुल भून लेते है पर ऐसा नहीं करना चाहिए, करेले को बिलकुल भून लेने पर उसमे मौजूद कड़वापन बिलकुल समाप्त हो जाता है जिसके बाद करेले की सब्जी खाने का कोई लाभ नहीं वो सिर्फ स्वाद के लिए खाई जा रही है। करेले में मौजूद कड़वापन ही तो वह कारण है जो शुगर को सामान्य करता है। तो अब अगर आप शुगर सामान्य करने की लिए करेले की सब्जी बनाना चाहते है तो ये बात जरूर याद रहे।
2) करेले का जूस - रोज सुबह टहलने के बाद करेले का जूस आपकी सेहत के लिए बहुत लाभदायक है स्पेशली शुगर मरीज़ के लिए। अपनी रोज की दिनचर्या में करेले का जूस तब तक पिए जब तक की शुगर कंट्रोल में जाये। करेले के जूस से आप शुगर को कंट्रोल कर सकते है।
3) करेले का चूर्ण - करेले को सुखाकर उसका चूर्ण बनाकर खाली पेट लेने से आप शुगर कंट्रोल कर सकते है। करेले का चूर्ण भी शुगर को बहुत तेज़ी से काम करता है
अचूक विधि - करेले को कूट कर या मिक्सी में पीस करे उसका जूस निकालकर उसे एक बड़े बर्तन में रखे और मरीज़ के दोनों पैर उस में डालने को कहे और मरीज़ द्वारा पैरों को लगभग १५ - २० मिनट तक चलाना चाहिए या जब तक मरीज के जीभ में कड़वापन आजाये। जब मरीज के जीभ में कड़वापन आजाए तो पैर हटा लेने चाहिए और ये क्रम20 दिन से1.5 महीने तक करना चाहिए इसके आश्चर्यजनक परिणाम मिलेंगे।
  


2. जामुन का करें प्रयोग



 जामुन भले ही एक साधारण सा फल हो लेकिन इसमें वो पावर है जो शुगर को कई हद तक सामान्य कर सकती है। शुगर वाले व्यक्ति हो जामुन बहुत ही लाभदायक माना गया है। जामुन का भी हम कई तरीके से प्रयोग कर सकते है कई लोगो का मानना है की जामुन का सिरका पीने से शुगर के मरीज़ को बहुत जल्दी लाभ मिलेगा और शुगर का लेवल भी सामान्य होगा। इस का बीज भी बहुत लाभदायक है जामुन के बीज को धो लें और उसके बाद सूखा ले, सुखा लेने के बाद उसको पीस लो पीसने के बाद जो चूर्ण बनेगा उसे एक डब्बे में रख लीजिए। उसके बाद रोज सुबह खाली पेट सादा पानी के साथ लेने से इसे चमत्कारिक परिणाम दिखेंगे। ये भी माना गया है की जामुन खाने के पहले और बाद में 15 मिनट तक दूध नहीं पीना चाहिए। आप जामुन का एक और नुस्खा भी उपयोग कर सकते है, जामुन के चार हरे नरम पत्ते बारीक पीस कर 70 मिलीलीटर पानी में रगड़कर छान लें उसके बाद, सुबह10  दिन तक लगातार पीएं ( उससे ज्यादा नहीं ) फिर दो महीने बाद वापिस प्रयोग में ले सकते है। इससे आपकी शुगर सामान्य हो जाएगी।
 

3. अंजीर के पत्ते





 शुगर सामान्य करने में अंजीर के पत्तों का भी बहुत बड़ा योगदान है। इसकी सहायता से भी आप शुगर के लेवल को कुछ हद तक सामान्य कर सकते है। इस टॉपिक में हम आपको अंजीर के पत्तों को कैसे इस्तेमाल करे ये बताने जा रहे है। सबसे पहले अंजीर के सात से आठ पत्ते लें उसके बाद इन पत्तों को हलकी आंच पर उबलने रख दें पांच से : मिनट बाद सारे पत्ते निकल लें उसके बाद वह बचा हुआ गुनगुना पानी पीलें ये आपकी शुगर सामान्य करने के बहुत हेल्प करेगी। अंजीर के पत्तों को आप ऐसे ही चबा कर खा सकते है ये भी बहुत फायदेबंद साबित होगा.
  

4. लौकी का उपयोग



  लौकी किसी भी रूप में हो शुगर के मरीज़ के लिए बहुत उपयोगी होती है। लौकी को आप अलग अलग तरीके से उपयोग में ले सकते है
(1) लौकी का जूस - लौकी का जूस शुगर के मरीज़ को लेना चाहिए जिससे ये शुगर का लेवल सामान्य करता है, हाँ एक बात और याद रहे ये जूस अगर खाली पेट लिया जाये तो बहुत ही लाभदायक होगा।
(2) लौकी की सब्जी - लौकी की सब्जी शुगर के मरीज़ को जरूर खानी चाहिए। लेकिन इसमें सब्जी बनाने का तरीका बहुत महत्वपूर्ण है सब्जी में ज्यादा तेल मसाला नहीं होना चाहिए हो सके तो लाल मिर्च की जगह हरी मिर्च का उपयोग करना चाहिए।
(3) लौकी का रायता - अगर आप खाने के साथ लौकी का रायता लेते है तो ये भी आपके लिए बहुत फायदेबंद होगा ये शुगर का लेवल कंट्रोल करता है।

 5. लहसुन का उपयोग



लहसुन भी शुगर लेवल कंट्रोल करता है। लहसुन को सुबह सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ चबाकर खाना चाहिए।

 टमाटर, खीरा, करेला और सदाबहार के पांच फूल या फिर पांच : नीम के पत्ती का जूस बनाकर लेने से भी शुगर कंट्रोल होता है। काले चने को रात में दूध में भिगो दें फिर सुबह उठते ही उन भीगे हुए चनो का सेवन करने से शुगर काम होता है। एलोवेरा के जूस में हल्दी मिलाकर पीने से बहुत फायदा होता है।

6. बरगद का उपयोग

  बरगद के पेड़ की छाल भी शुगर मरीज़ के लिए उपयोगी मानी गई है। २० से २५ ग्राम बरगद के पेड़ की छाल लेकर उसे कूट ले उसमे आधा लीटर पानी डाल कर उसे उबाले और उसका काढ़ा बन ले जब चौथाई पानी बच जाये तो उसे उतार कर छान ले फिर उसे ठंडा होने पर मरीज़ को पिला दें। इसे रोज़ाना आठ दस दिन तक सेवन करने से शुगर सामान्य होने लगता है। और इसका सेवन सुबह शाम करें तो अधिक फायदा होगा।
  

7. आंवला का उपयोग



  आप आंवला को कई तरीके से उपयोग में ले सकते है ये शुगर कंट्रोल करता है। आंवला का जूस लें या फिर आंवले का चूर्ण खाली पेट सादे पानी से लेना चाहिए। आंवले का मुरब्बा या फिर आंवले का अचार भी खाने से शुगर के मरीज़ को बहुत ही आराम मिलेगा।


8. मैथी दाना से शुगर कम करें



   मैथी दाना को रात को एक कप पानी में भिंगो दें सुबह होते ही उस पानी को पी जाएँ तथा उस पानी में से सारी मैथी दाना निकालकर खाने से शुगर सामान्य होने लगती है। मैथी दाना को आप सब्जी, चूर्ण या फिर चटनी बना कर भी ले सकते है। इसका प्रयोग रोज़ करने से शुगर बहुत जल्दी सामान्य हो जाता है।
 

शुगर 
  आम के पत्ते को चबाकर खाने से या इसका चूर्ण लेने से शुगर कंट्रोल में बहुत हेल्प मिलती है। इस चूर्ण को खाली पेट लेना चाहिए और हो सके तो दिन में दो बार ले कर शुगर कंट्रोल की जा सकती है।

Sugar ka ayurvedic upchaar


1. काला जामुन: ये ब्लड-शुगर को कम करने में मदद करता है और ह्रदय संबंधी बीमारियों से शरीर को दूर रखता है।

2.   टमाटर- मधुमेह के रोगी के लिए टमाटर बहुत लाभदायक है। मूत्र में शक्कर आना धीरे-धीरे कम हो जाता है। प्रमेह में भी यह उपयोगी है
 
 3.  गाजर- गाजर का रस 310 ग्राम, पालक का रस 185 ग्राम मिलाकर नमक, जीरा डालकर पीने से मधुमेह रोग में फायदा होता है।
 

4.   मधुमेह के रोगी नित्य जामुन खानीचाहिए।जामुन की गुठली का चूर्ण आधा चम्मच शाम को पानी के साथ लेने से शर्करा आना ठीक हो जाता है।
   
  

5.   दिन में दो बार मूली खाने से या मूली का रास पीने से मधुमेह में लाभ होता है
  

6.  मेथी दान 60 ग्राम बारीक पीस कर एक गिलास पानी में भिगो दे इसे १२ घंटे बाद छानकर पिये। इस प्रकार सुबह -शाम दो बार नित्य 6 सप्ताह पीने से मधुमेह ठीक हो जाता है। इसके साथ मेथी के हरे पत्तो सब्जी भी खाए।


7.  बबूल के गोंद का चूर्ण 3 ग्राम पानी के साथ अथवा गोदुग्ध के साथ दिन में 3 बार नित्य लेना चाहिये। मधुमेह के लिये यह एक लाभकारी सरल प्रयोग है।
 

8.  बबूल की कोमल पत्तियाँ उखाड़ कर लायें और उन्हें सिल पर जल योग से पीसें। साथ ही 4.5 काली मिर्च भी डाल दें और छान कर पीवें। इससे भी मधुमेह में लाभ सम्भव है। प्रातः-सायं दोनों समय पीवें |
  

9.  गूलर के पत्ते मधुमेह में लाभकारी हैं। उन्हें पानी के साथ सिल पर ठण्डाई के समान घोट कर पीना चाहिये। यदि कब्ज या अपच की षिकायत हो, तो इस योग से लाभ उठाया जा सकता है।
  

10   गूलर का पका फल वृक्ष से तोड़कर, ताजा खाना भी हितकर है। ऊपर से ताजा पानी ही लेना चाहिए
  

11  मधुमेह के मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में खीरा नींबू निचोड़कर खाकर भूख मिटाना चाहिए।
   

12  नीम: देश में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले नीम के पत्ते स्वाद में कडवे होते हैं पर इनमें बहुत सी खासियतें हैं। नीम इन्सुलिन रिसेप्टर सेंसिटिविटी बढाने के साथ साथ शिराओं धमनियों में रक्त प्रवाह को ठीक करता है और हाइपो ग्लाय्केमिक ड्रग्स पर निर्भर होने से बचाता है। नुस्खा: बेहतर नतीजों के लिए नीम के पत्तों का जूस रोज़ सुबह खाली पेट लें।
   

13  मधुमेह उपचार मे शलजम का भी बहुत महत्व है शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होने लगती है। इसके अतिरिक्त मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का प्रयोग भी ज्यादा करना चाहिए।


14  6 बेल पत्र , 6 नीम के पत्ते, 6 तुलसी के पत्ते, 6 बैगनबेलिया के हरे पत्ते, 3 साबुत काली मिर्च ताज़ी पत्तियाँ पीसकर खाली पेट, पानी के साथ लें और सेवन के बाद कम से कम आधा घंटा और कुछ खाएं , इसके नियमित सेवन से भी शुगर सामान्य हो जाती है
  

 15  नारियल का तेल - नारियल का तेल डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत हीं फायदेमंद होता है। नारियल के तेल में कुछ खास और दुर्लभ वसा अणु होते हैं जो आपकी कोशिकाओं को बिना इंसुलिन की मदद के आहार प्रदान करता है।
  

16  आंवलाः मधुमेह के रोगियों के लिए विटामिनसी की प्रचुर मात्रा के कारण आंवला बेहद उपयोगी माना जाता है। यदि मधुमेह का रोगी आंवला करेले का रस मिलाकर प्रतिदिन पीता रहे तो इससे उसके शरीर में इंसुलिन की तथा रक्त में शर्करा की भी पूर्ति होती रहती है। मधुमेह के रोगी आंवला, जामुन की गुठली तथा करेले का चूर्ण बनाकर नित्य एक चम्मच लें तो काफी लाभ होता है।
 
17.  आमः मधुमेह यदि प्रारंभिक स्थिति में हो तो आम के कोमल पत्तों का रस अथवा प्रात:काल उनका काढ़ा बनाकर पीएं। इससे रोग आगे नहीं बढ़ेगा तथा गंभीर रूप धारण नहीं करेगा। आम के पत्तों को सुखाकर उनका चूर्ण बनाकर एक-एक चम्मच चूर्ण पानी के साथ दिन में दो बार लेने से निश्चित रूप से लाभ होता है। आम जामुन का रस समान मात्रा में मिलाकर पीने से मधुमेह में काफी लाभ होता है। आम की गुठली का चूर्ण बनाकर तीन ग्राम की मात्रा में दिन में 3-4 बार पानी के साथ सेवन करने से मूत्र में शर्करा की मात्रा कम होती है मधुमेह के रोगी की प्यास शांत होती है।
  

 18 चकोतराः यदि चकोतरा काफी मात्रा में लिया जाए तो मधुमेह के पूर्णत: समाप्त होने की प्रबल संभावना रहती है। चकोतरे के सेवन से शरीर में स्टार्च की मिठास और वसा में कमी आती है जो मधुमेह के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद है| मधुमेह के रोगियों को 2-3 चकोतरे नित्य खाने कि सलाह दी जाती है।

शुगर का आयुर्वेदिक उपचार -2 


शुगर का सबसे बढ़िया आयुर्वेदिक इलाज भारत में 10 करोड़ 70 लाख से ज्यादा लोगों को डाइबटीज है और 3 करोड़ से ज्यादा को हो जाएगी अगले कुछ सालों में (सरकार ऐसा कह रही है), हर 2 मिनट में एक आदमी डाइबटीज से मर जाता हैं! और complications बहुत है!  किसी की किडनी खराब हो रही है ,किसी का लीवर खराब हो रहा है , किसी को paralisis हो रहा है किसी को brain stroke हो रहा है ,किसी को heart attack रहा है ! कुल मिलकर complications बहुत है diabetes के!!  मधुमेह या चीनी की बीमारी एक खतरनाक रोग है। रक्त ग्लूकोज (blood sugar level ) स्तर बढा़ हूँआ मिलता है, यह रोग मरीजों के (रक्त मे गंदा कोलेस्ट्रॉल,) के अवयव के बढने के कारण होता है। इन मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है।  भोजन पेट में जाकर एक प्रकार के ईंधन में बदलता है जिसे ग्लूकोज कहते हैं। यह एक प्रकार की शर्करा होती है। ग्लूकोज हमारे रक्त धारा में मिलता है और शरीर की लाखों कोशिकाओं में पहुंचता है। pancreas (अग्न्याशय) ग्लूकोज उत्पन्न करता है इनसुलिन भी रक्तधारा में मिलता है और कोशिकाओं तक जाता है।  मधुमेह बीमारी का असली कारण जब तक आप लोग नही समझेगे आपकी मधुमेह कभी भी ठीक नही हो सकती है जब आपके रक्त में वसा (गंदे कोलेस्ट्रोल)LDL की मात्रा बढ जाती है तब रक्त में मोजूद कोलेस्ट्रोल कोशिकाओ के चारों तरफ चिपक जाता है !और खून में मोजूद जो इन्सुलिन है कोशिकाओं तक नही पहुँच पाता है (इंसुलिन की मात्रा तो पर्याप्त होती है किन्तु इससे द्वारो को खोला नहीं जा सकता है, अर्थात पूरे ग्लूकोज को ग्रहण कर सकने के लिए रिसेप्टरों की संख्या कम हो सकती है)  वो इन्सुलिन शरीर के किसी भी काम में नही आता है जिस कारण जब हम शुगर level चैक करते हैं शरीर में हमेशा शुगर का स्तर हमेशा ही बढा हुआ होता है क्यूंकि वो कोशिकाओ तक नहीं पहुंची क्योंकि वहाँ (गंदे कोलेस्ट्रोल)LDL VLDL जमा हुआ है जबकि जब हम बाहर से इन्सुलिन लेते है तब वो इन्सुलिन नया-नया होता है तो वह कोशिकाओं के अन्दर पहुँच जाता है ! अब आप समझ गये होगे कि मधुमेह का रिश्ता कोलेस्ट्रोल से है कि शुगर से तो ऐसी स्थिति मे हम क्या करें ? आप insulin पर ज्यादा निर्भर ना रहें! तो आप ये आयुर्वेद की दवा का फार्मूला लिखिये और जरूर इस्तेमाल करें!!  100 ग्राम (मेथी का दाना) ले ले इसे धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !  100 ग्राम (तेज पत्ता ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !  150 ग्राम (जामुन की गुठली )लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !  250 ग्राम (बेलपत्र के पत्ते ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें ! तो मेथी का दना – 100 ग्राम  तेज पत्ता - 100 ग्राम  जामुन की गुठली -150 ग्राम  बेलपत्र के पत्ते – 250 ग्राम  तो इन सबका पाउडर बनाकर इन सबको एक दूसरे मे मिला लें ! बस दवा तैयार है !!  इसे सुबह -शाम (खाली पेt) 1 से डेड चम्मच से खाना खाने से एक घण्टा पहले गरम पानी के साथ लें !!  2 से 3 महीने लगातार इसका सेवन करें!! (सुबह उठे पेट साफ करने के बाद ले लीजिये )  कई बार लोगो से सीधा पाउडर लिया नहीं जाता ! तो उसके लिए क्या करें ?  आधे से आधा गिलास पानी को गर्म करे उसमे पाउडर मिलाकर अच्छे से हिलाएँ !! वो सिरप की तरह बन जाएगा! उसे आप आसानी से एक दम पी सकते है! उसके बाद एक आधा गिलास अकेला गर्म पानी पी लीजिये!! अगर आप इसके साथ एक और काम करे तो सोने पे सुहागा हो जाएगा ! और ये दवा का असर बहुत ही जल्दी होगा !! जैसा कि आप जानते है शरीर की सभी बीमारियाँ वात,पित ,और कफ के बिगड़ने से होती हैं !! दुनिया मे सिर्फ दो ही ओषधियाँ है जो इन तीनों के सतर को बराबर रखती है !!  एक है गौ मूत्र , दूसरी है त्रिफला चूर्ण !!  गौ मूत्र बिलकुल ताजा पिये सबसे बढ़िया !! बाहरी प्रयोग के लिए जितना पुराना उतना अच्छा है लेकिन पीने के लिए ताजा सबसे बढ़िया!! हमेशा देशी गाय का ही मूत्र पिये (देशी गाय की निशानी जिसकी पीठ पर हम्प होता है ) ! 3 -4 घंटे से अधिक पुराना मूत्र ना पिये!!  और याद रखे गौ मूत्र पीना है अर्क नहीं ! आधे से एक सुबह सुबह कप पिये ! सारी बीमारियाँ दूर! अब बात करते हैं त्रिफला चूर्ण की !  त्रिफला अर्थात तीन फल !  कौन से तीन फल !  1) हरड़   2) बहेडा  3) आंवला एक बात याद रखें इनकी मात्रा हमेशा 1:2:3 होनी चाहिए ! 1 अनुपात 2 अनुपात 3 !  बाजार मे जितने भी त्रिफला चूर्ण मिलते है सब मे तीनों की मात्रा बराबर होती है ! बहुत ही कम बीमारियाँ होती है जिसमे त्रिफला बराबर मात्रा मे लेना चाहिए !!  इसलिए आप जब त्रिफला चूर्ण बनवाए तो 1 :2 :3 मे ही बनवाए ,सबसे पहले हरड़ 100 ग्राम , फिर बहेड़ा 200 ग्राम और अंत आंवला 300 ग्राम !!  इन तीनों को भी एक दूसरे मे मिलकर पाउडर बना लीजिये और रात को एक से डेड चमच गर्म दूध के साथ प्रयोग करें !!  सावधानियाँ !!  चीनी का प्रयोग कभी ना करें और जो sugar free गोलियां का तो सोचे भी नहीं !!  गुड़ खाये , फल खाये ! भगवान की बनाई गई को भी मीठी चीजे खा सकते हैं !!  रात का खाना सर्यास्त के पूर्व करना होगा !! मतलब सूर्य अस्त के बाद भोजन ना करें  ऐसी चीजे ज्यादा खाए जिसमे फाइबर हो रेशे ज्यादा हो, High Fiber Low Fat Diet घी तेल वाली डायेट कम हो और फाइबर वाली ज्यादा हो रेशेदार चीजे ज्यादा खाए। सब्जिया में बहुत रेशे है वो खाए, डाल जो छिलके वाली हो वो खाए, मोटा अनाज ज्यादा खाए, फल ऐसी खाए जिनमे रेशा बहुत है। 

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धनयाद। 



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