najla ka gharelu upchar

नजला जुकाम 

दोस्तों आप सबका स्वागत है , आज मैं आप लोगो के बीच ऐसी बिमारी का इलाज लेके आया हूँ जिससे 50 फीसदी से ज्यादा लोग एक समय मे ग्रस्त रहते है और इसकी पीड़ा को सहन करते रहते है। वैसे तो नजले जुकाम को कुछ लोग एक आम या साधारण बिमारी मान कर अनदेखा कर देते है लेकिन ये बीमारी अगर बढ़ जाती है तो अपना विकराल रूप बना कर मरीज की ज़िन्दगी को कष्टदायी बना देती है , जिससे न सिर्फ उसका बुरा असर उनकी जिंदगी पर पड़ता है बल्कि उसके काम काज पर भी पड़ता है।



ये रोग मौसम बदलने के दौरान ज्यादा होता पाया गया है जिसमे नाक की झिल्ली में सूजन आ जाती है। कहने को ये आम है लेकिन हमेशा परेशान करने वाला रोग है जिसकी पीड़ा को सिर्फ वही महसूस कर सकता है जिसे ये होता है। इसमें कफ की मात्रा बढ़ जाती है और ये अधिक कष्टदायक हो जाता है।  यह रोग अक्सर ठण्ड के मौसम में ज्यादातर होता है लेकिन गर्मी के मौसम में भी देखने को मिलता है जिसके कई कारण हो सकते है। 



आयुर्वेद में नजले जुकाम के 5 नाम बताये गए हैं जो इस प्रकार है -

1. वातज - ये वायु दोष से उत्पन्न होने वाला जुकाम है , जिसमे छींके आना , नाक से पतला स्राव निकलना , गले और होंठो का सूख जाना और हल्का सिर दर्द इसके लक्षण होते हैं। 

2. पीतज - इसमें नाक से पीले रंग का स्राव निकलना , नाक का पक जाना , हल्का बुखार होना और प्यास का ज्यादा लगना इसके लक्षण होते है। 

3. कफ़ज - इसमें नाक और गले में खुजली होना और आँखों और सिर में भारीपन होना इसमें लक्षण होते है। 

4. त्रिदोषज - वातज , पीतज और कफ़ज इन तीनो दोषों से होने वाला जुकाम बहुत कष्टदायक होता है। 

5. रक्तज - इसमें नाक से लाल रंग का स्राव बहना , सीने में दर्द , गंध का महसूस न होना और मुख से दुर्गन्ध आना मुख्य लक्षण होते है। 

  
इसके अतिरिक्त , खाने में खराबी , फ्रिज का पानी पीना , ज्यादा नशा करना जैसे शराब और धूम्रपान का अधिक सेवन करना , धूल मिटटी के कणो का नाक में चले जाना , गरम शरद की शिकायत होना ये अन्य कारण नजला जुकाम के हो सकते है। 


जुकाम का बिगड़ना - 

अगर जुकाम बिगड़ जाता है तो इससे उत्पन्न होने वाला कष्ट इसकी पहली स्टेज से पांचवी स्टेज तक रोगी को पहुंचाने में ज्यादा समय नहीं लगाता। अगर समय रहते जुकाम का उपचार नहीं किया जाता तो ये नजले का रूप धारण कर लेता है जो रोगी को बहुत कष्ट देता है , इसमें हर समय जुकाम रहता है और कफ का स्राव अंदर शुरू हो जाता है जिसका सीधा असर रोगी के फेफड़ों पर पड़ता है। जिससे हर समय सिर दर्द , आँखों में भारीपन , भूख का कम लगना आदि दिक्क़ते रोगी को महसूस करनी पड़ती है। 



इसकी तीसरी स्टेज को दमा कहा जाता है , ये बहुत ही भयंकर रोग होता है जिसमे रोगी को सांस फूलने जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है।  इसकी चौथी स्टेज अस्थमा होती है जिसमे रोगी को अचानक खांसी , छींके आना।, सर्दी लगना , सीने में जकड़न महसूस होना , सांस लेने में परेशानी महसूस करना , सांस लेते समय घबराहट होना , अधिक सांस लेने की वजह से पसीना आना और बेचैनी महसूस होना , सिर का हमेशा भारी रहना , कोई भी काम करने पर सांस का तेज होना और जल्दी थक जाना इसके मुख्य लक्षण होते है। 
अंत में इसकी आखिरी स्टेज टीबी होती है , आप समझ सकते है टीबी के बाद रोगी के बचने के chances नहीं होते है। 

इसलिए आप सब से मेरी यही सलाह है के इसको जुकाम से आगे न बढ़ने दें अन्यथा ये घातक सिद्ध हो सकती है और जीवन लीला का अंत भी कर सकती है। 

में आपको आज जुकाम या नजले के ऐसे घरेलु उपचार के बारे में बता रहा हूँ जो कहीं बहुत ही दुर्लभ है , ये उपचार किसी डॉक्टर के पास आपको नहीं मिलेगा क्यूंकि ये आयुर्वेद के ग्रंथों से लिया गया उपचार है।  चाहे 20 या 30 साल पुराना जुकाम नजला है , ये उपचार उसको 100 % जड़ से ख़तम कर देगा। आइये जानते है -

दवा के लिए सामग्री -

1. करंजुआ (करंज) के बीज -50 ग्राम (ऊपर का छिलका उतार के गीरी निकाल लेनी है) इसका छिलका बहुत कड़क होता है अतः किसी लोहे की मदद से उतारें। 


2. मुनक्का दाख बड़ी - 50 ग्राम (इसके बीज निकाल के फेंक दे , सिर्फ मुनक्का ही इस्तेमाल करना है)


3. काली मिर्च साबुत - 50 ग्राम 



दवा बनाने की विधि -

करंज के बीज के गीरी को किसी बड़े खरल में बारीक पीसकर पाउडर बना लेना है और किसी बर्तन में निकाल लेना है। उसके बाद काली मिर्च को पीसकर पाउडर बना लेना है। अंत में करंज के बीजों का पाउडर और काली मिर्च का पाउडर दोनों के खरल में डाल कर मुनक्का के साथ कूटना है , उन तीनो को इस प्रकार कूटना है के अच्छे से मिक्स हो जाये और गीले आटे की तरह बन के तैयार हो जाये। फिर इसकी चने के बराबर गोलियां बनानी हैं , करीबन 130 -140 गोलियां बन के तैयार हो जाएँगी।  गोलियों को किसी कांच की शीशी में भर कर रख लेना है, बस आपकी दवा तैयार है। 

दवा लेने का तरीका -

एक गोली सुबह खाली पेट और एक गोली शाम को खाली पेट एक चम्मच शुद्ध देशी शहद के साथ चबा कर सेवन करनी है। 


सावधानी - 

1. गर्मी के मौसम में सिर्फ एक ही गोली का सेवन करें। 
2. 5 साल से काम उम्र के बच्चे को 1 गोली का 5वां हिस्सा सिर्फ सुबह के समय 15 दिन तक दे सकते है। 
3. 6 से 18 साल के बच्चे को 1 गोली का 4वां हिस्सा दे सकते है , ये 30 दिन तक दे सकते है। 
4. 19 से 25 साल तक के लड़के को 1 गोली का 2वां हिस्सा दे सकते है ,ये 30 दिन तक दे सकते है।
5. 26 साल से अधिक उम्र वाला व्यक्ति गर्मी के मौसम में 1 गोली का सेवन 4 महीने तक कर सकता है और अगर ठण्ड का मौसम है तो सुबह शाम एक एक गोली का सेवन 2 महीने तक कर सकता है। 

दोस्तों , ये सावधानियां बहुत ही महत्वपूर्ण हैं क्यूंकि ये गोलियां बहुत गरम तासीर की होती है , ज्यादा मात्रा में सेवन करने से रोगी को लिवर में गर्मी बढ़ सकती है अतः दिए गए निर्देशों का पालन जरूर करें अगर आप इस दवा का सेवन करते हैं तो। 


जरूरी फरहेज -

ठंडी चीजें की मनाही है 
खट्टी चीजें की मनाही है 
लाल मिर्च की मनाही है 
कोई भी तला हुआ नहीं खाना है 
शराब नहीं पीनी है 
धूम्रपान नहीं करना है 
सिर्फ दूध नहीं पीना है , दूध में हल्दी डाल के पी सकते है 
चाय नहीं पीनी है 
दही , लस्सी का सेवन नहीं करना है 
कोई भी नॉनवेज नहीं खाना है 
ज्यादा गरम चीजों के सेवन से बचना है 

ऊपर दी गयी सावधानियां और फरहेज बहुत महत्वपूर्ण है अतः इनका पालन करना बहुत जरूरी है। 

इसके अलावा , फ्रूट खा सकते है (केला छोड़के) कोई भी। 
तोहरी , बैंगन , घीया लहसुन ये सब गरम तासीर की सब्जियां है, इनके सेवन से बचना है , दवा के दौरान ऐसी चीजों का सेवन करना बेहतर होगा जिनकी तासीर ज्यादा गरम न हो। 

अगर इस पोस्ट से सम्बंधित कोई भी जानकारी लेना चाहते है तो मुझे मैसेज बॉक्स में लिख सकते है , पोस्ट अगर अच्छा लगे तो जनहित में शेयर जरूर करे जिसका लाभ जनजीवन उठा सके। ये बहुत सफल और कारगर नुस्खा है जिसका लाभ हजारों लोग उठा चुके हैं। 



धनयवाद। 



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